Live-news: बिरसा मुंडा के शहीदी दिवस पर जाने उनके जीवन की कुछ विशेष बाते।

Live-news: बिरसा मुंडा के शहीदी दिवस पर जाने उनके जीवन की कुछ विशेष बाते।


Live:news: नौ जून, भगवान बिरसा मुंडा का शहादत दिवस, अत्याचार के आगे नहीं झुकने आैर विपरीत माहाैल में भी हार नहीं मानने की प्रेरणा देता है। बिरसा मुंडा से जुड़ी स्मृतियां-स्थल हमारी धराेहर हैं। इन्हें बचाना, विकसित करना सभी झारखंडियाें का धर्म है। बिरसा मुंडा की जन्मस्थली, सईल रकब, रांची की पुरानी जेल (जिस कमरे में बिरसा मुंडा बंद थे) आैर काेकर स्थित समाधि स्थल दरअसल में चार धाम हैं। प्रभात खबर की यह पहल है कि इन चाराें स्थलों को धाम में विकसित किया जाये। यही भगवान बिरसा मुंडा के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।


 उलिहातू : यह भगवान बिरसा मुंडा का जन्म स्थान है। इसी उलिहातू में 15 नवंबर, 1875 काे भगवान बिरसा मुंडा का जन्म हुआ था। अब इस स्थान काे विकसित कर दिया गया है. उस घर में बिरसा मुंडा की प्रतिमा लगी है, जहां उनका जन्म हुआ था. पुराने घर काे भी ठीक कर नया रूप दिया गया है।

सईल रकब : यह वह पहाड़ी है, जहां नौ जनवरी, 1900 काे बिरसा मुंडा के समर्थकाें आैर अंगरेजाें के बीच संघर्ष हुआ था. यह अंतिम लड़ाई थी। अंगरेजाें की फाैज ने बिरसा मुंडा के समर्थकाें पर गाेलियाें की बाैछार की थी। बड़ी संख्या में मुंडाआें ने शहादत दी थी। डॉ रामदयाल मुंडा ने यहां विशाल स्मारक बनवाया था।

रांची जेल : रांची के बीच शहर में यह वह पुरानी जेल है, जहां 3 फरवरी, 1900 काे हुई गिरफ्तारी के बाद बिरसा मुंडा काे रखा गया था. वह कक्ष सुरक्षित है जिसमें उन्हाेंने 9 जून, 1900 काे अंतिम सांस ली थी। अब इस जेल का पुनरुद्धार किया गया है. परिसर में ही बिरसा मुंडा की विशाल प्रतिमा लगी है।

समाधि स्थल : झारखंड की राजधानी रांची के काेकर में स्थित यह वह स्थान है, जहां बिरसा मुंडा का अंतिम संस्कार किया गया था। यहां एक छाेटी नदी बहती थी जिसके तट पर अंतिम संस्कार किया गया था. अब वहां पर बिरसा मुंडा की भव्य समाधि बनायी गयी है।

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